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| उपजोन खरगोन में निकलेंगी ... |
1 sep 2010
खरगोन (मध्य प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ खरगोन में १८ जुलाई को उपजोन के वरिष्ठ कायर्कत्ताओं की गोष्ठी हुई । इसमें खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, आलीराजपुर, खण्डवा एवं बुरहानपुर के लगभग ३०० परिजनों ने भाग लिया । इसे संबोधित करते हुए डॉ. शंकरलाल पाटीदार ने भोपाल से आरंभ हो रही जन्म... |
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गायत्री शक्तिपीठ बराकर में दिनांक २० दिसम्बर के दिन शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री दयाशंकर शर्मा एवं श्री विनय वाजपेयी की मुख्य उपस्थिति में प्रांतीय चिंतन बैठक हुई । इस बैठक में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के आयोजन में मिली सफलता और भावी कार्ययोजना पर प्रमुखता से चर्चा हुई । उल्लेखनीय है कि अभी दो वर्ष पूर्व ही बंगला भाषा में यह परीक्षा मात्र १०० विद्यार्थियों से आयोजित हुई थी, इस वर्ष २५००० विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया । प्रांतीय संयोजिका श्रीमती अंजना महेरिया, सह संयोजक श्री पारसनाथ शुक्ला और साथियों के नैष्ठिक प्रयासों से परीक्षा की भावी सफलता के लिए दिन दूने-रात चौगुने प्रयास किये जा रहे हैं ।
बैठक में देशभर में पुस्तक मेलों की सफलता पर प्रकाश डाला गया । सोये शेर के जगने की तरह बंगाल क्षेत्र ने वर्ष २०१० के प्रथम माह में ही बोलपुर, दुर्गापुर, आसनसोल, सिलीगुड़ी, कोलकाता आदि अनेक स्थानों पर पुस्तक मेले आयोजित करने की जानकारी दी । कोलकाता के टाउन हॉल में एक विशाल पुस्तक मेला १८ से २४ जनवरी २०१० की तारीखों में ३२ मदन मित्रा लेन कार्यालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है। सभी पुस्तक मेलों की सफलता के लिए सैकड़ों की संख्या में युग निर्माणी केशरिया बाना पहने कंधे पर जन्म शताब्दी का झोला टाँगे निकल पड़े हैं ।
चिंतन बैठक में ५० प्राणवान परिजनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विद्या विस्तार यज्ञों के आयोजन के संकल्प लिये । विभिन्न पत्रिकाओं की सदस्यता बढ़ाने के संकल्प लिये गये । सर्वश्री विजय कुमार शर्मा, कैलाश चंद्र शर्मा, हरीश तोषनीवाल, ओम डालमिया, दीनदयाल कुलश्रेष्ठ, श्रीमती वैष्णवी देवी, अल्बर्ट दीपक डेविड, विभूतिशरण जी, श्रीमती नमिता मुखर्जी आदि अने अपने-अपने कार्यक्षेत्रो की प्रगति के साथ विविध विषयों पर अपने विचार व्यक्त किये । बंगला भाषा में एक शिविर के आयोजन और बंगला साहित्य प्रकाशन की आवश्यकता प्रायः प्रत्येक वक्ता ने की । श्रीमती तारा केशरी ने महिला मण्डलों को सक्रिय बनाने के सूत्रों की चर्चा की । बैठक का समापन शक्तिपीठ बराकर के मुख्य ट्रस्टी श्री विजय खेमानी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ ।
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