शांतिकुंज सहर्ष मना ज्ञान और प्रेम का ...
युगसृजेता-शूरमाओं के अंतस् को छू गया ऋ...
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केशरिया उमंगों ने खिलाये तिरंगे के रं...
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उपजोन खरगोन में निकलेंगी ...

1 sep 2010
खरगोन (मध्य प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ खरगोन में १८ जुलाई को उपजोन के वरिष्ठ कायर्कत्ताओं की गोष्ठी हुई । इसमें खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, आलीराजपुर, खण्डवा एवं बुरहानपुर के लगभग ३०० परिजनों ने भाग लिया । इसे संबोधित करते हुए डॉ. शंकरलाल पाटीदार ने भोपाल से आरंभ हो रही जन्म...

लॉयन्स क्लब इंटरनेशनल का पदस्थापना समारोह
प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन - 'विजन इण्डिया-२०२०'
राष्ट्रसंत तुकड़ो जी महाराज की साधना स्थली पर आयोजित हुआ कृषि व ऋषि चिंतन शि...
वैज्ञानिक-विद्वानों ने विशिष्ट यज्ञ अभियान आरंभ किया
शिष्य के समर्पण और सेवाभाव का अभिनंदन
मुम्बई के महायज्ञ से सम्पर्क में आयी विभूतियों की संगोष्ठी
चिकित्सा जगत के अध्यात्म से बढ़ते संबंध
'नॉलेज इकोनॉमी' पर एक परिचर्चा
प्रगतिशील मनीषा आध्यात्मिक रुचि जगाते नवयुवक
दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय की सेमीनार
सूरत में 'कार्यक्षेत्र में आध्यात्मिकता' विषय पर सेमीनार सम्पन्न
चिकित्सा विज्ञान में आध्यात्मिक दृष्टिकोण' विषय पर संगोष्ठी
मुम्बई में विभूतियों पर गहरी छाप छोड़ते दो विशिष्ट आयोजन
पहुना में मुख्यमंत्री जी से वार्ता
शांतिकुंज ने दिया मार्मिक चिंतन, कैसे हो विचारों का प्रबंधन
उत्तराखण्ड के राजभवन में गायत्री यज्ञ
ऋषि चिंतन का विस्तार करते विचार क्रांति के विविध प्रयोग
समाज की पथ-प्रदशर्क विभूतियों को आकषिर्त कर रहा है युगऋषि का चिंतन
भारतीय थल सेना के साथ प्रगाढ़ होते संबंध
परिजनों एवं प्राचार्यों की संगोष्ठी एवं प्रशासन का सहयोग
राष्ट्रसंत तुकड़ो जी महाराज की साधना स्थली पर आयोजित हुआ कृषि व ऋषि चिंतन शिविर
4-1-2010

ऋषि और कृषि मात्र वर्ग या व्यवसाय ही नहीं, जीवन शैली हैं

मोझरी, अमरावती (महाराष्ट्र)
विज्ञान ने इन दिनों सुविधाओं का अंबार लगाया है, लेेकिन मनुष्य सुखी नहीं है। हमारे शास्त्रों में लोभ, मोह, अहंकार, आलस्य, प्रमाद आदि को शत्रु माना गया है। विज्ञान की बढ़ती सुविधाओं के साथ ये दुर्गुण मानव में बढ़ते गये हैं। विज्ञान ने व्यक्ति की आकांक्षाओं को सुरसा की तरह बढ़ा दिया है, जो कभी पूरी नहीं हो सकतीं। बढ़ती चाह के साथ दुःख बढ़ते ही जाते हैं । इनका समाधान विज्ञान के पास नहीं है। इनसे मनुष्य को मुक्ति चाहिए तो आध्यात्मिक जीवन शैली ही अपनानी पड़ेगी। ऋषि और कृषि केवल वर्ग या व्यवसाय ही नहीं हैं, एक जीवन शैली हैं, जो व्यक्ति को साधना और संयम का पाठ सिखाती हैं।

सुप्रसिद्ध संत तुकड़ो जी महाराज की साधना स्थली मोझरी में दिनांक २९ एवं ३० नवम्बर को 'कृषि व ऋषि चिंतन शिविर' का आयोजन हुआ। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने इसमें युगऋषि का संदेश देते हुए उपरोक्त उद्गार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि विज्ञान की प्रगति बुरी नहीं है, लेकिन उस पर अध्यात्म का अंकुश आवश्यक है। वैज्ञानिकों का चिंतन बदले और खोजों की दिशा ठीक हो तो सीमित साधनों में भी यह संसार सुख की अनुभूति कर सकता है। टॉनिक पीकर स्वस्थ होने की अपेक्षा प्राणायाम से आत्मशक्ति का अभिवर्धन करना बेहतर है।

गायत्री परिवार, नागपुर की इकाई 'साइंस एवं स्पिरिचुअलिटी फोरम' ने अखिल भारतीय श्री गुरुदेव सेवा मण्डल, मोझरी के सहयोग से इस चिंतन शिविर का आयोजन किया था। आदरणीय डॉ. प्रणव जी दोनों दिन शिविर में उपस्थित रहे। उनके अलावा डॉ. एस.एन. सुब्बाराव-राष्ट्रीय युवा प्रकोष्ठ नयी दिल्ली, श्री प्रकाशदादा वाघ-सर्वाधिकारी गुरुकुंज, डॉ. व्यंकट मायंदे-कुलपति पंजाबराव कृषि विवि, डॉ. अरुण निनावे-कुलपति महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विद्यापीठ, डॉ. कमल सिंह-कुलपति संत गाडगेबाबा अमरावती विद्यापीठ, अर्थशास्त्री डॉ. योगानंद काळे, डॉ. सी.एस. चौधरी, डॉ. एस.एच. प्रीत-भारतीय स्वाभिमान संघ, श्री वामन महाराज-वारकरी संप्रदाय, डॉ. सुनील मानसिंग, श्री एस.एन. नुवाल, श्रीकृष्ण व्यास, श्री मधुकर लोहे, शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री शरद पारधी, डॉ. डी.पी. सिंह आदि महानुभावों ने भाग लिया।

इस शिविर में सामूहिक खेती संगठन, आधुनिक तंत्रज्ञान एवं खेती, जैविक खेती एवं सामाजिक आरोग्य, रासायनिक एवं कीटनाशकों के दुष्प्रभाव, जल की खेती, गोमूत्र से कीटनाशकों का निर्माण आदि विषयों पर चर्चा हुई। किसानों की दुदर्शा के कारण वषर् १९८३ से आज तक २ लाख १८ हजार किसानों की आत्महत्या आदि विषय प्रमुखता से उठाये गये। शिविर में ऋषियों के द्वारा बतायी गयी जीवन शैली और जैविक कृषि की ओर लौटने की प्रबल प्ररेणा प्रतिभागियों को दी गयी । इस सम्मेलन में पूरे महाराष्ट्र के हजारों किसानों ने भाग लिया।

मोझरी में शांतिकुंज के प्रमुख प्रतिनिधि का भावभरा स्वागत हुआ। आयोजन स्थल पहुँचते ही उन्होंने संत तुकड़ो जी महाराज की समाधि पर पुष्पांजलि अपिर्त की। तत्पश्चात उन्हें पारंपरिक दिण्डी व लोकवाद्यों की मंगल ध्वनि के साथ आयोजन स्थल पर ले जाया गया। प्रातः के उद्घाटन सत्र एवं दोपहर कालीन सत्र को उन्होंने संबोधित किया। अगले दिन प्रातः मंगल प्रवचन एवं ध्यान के साथ उन्होंने प्रतिभागियों को आत्मिक आनंद से भावविभोर कर दिया। प्रातःकाल २४ कुण्डीय यज्ञ हुआ, सैकड़ों लोगों ने दीक्षा ली। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनों को जीवन में कृषितंत्र और ऋषितंत्र का समन्वय करने के युगऋषि के सत्संकल्पों पर आधारित संकल्प दिलाये।
शिविर का आयोजन साइंस एण्ड स्पिरिचुअलिटी फोरम के संयोजक डॉ. विनय हजारे, श्री दीपक बिडवई, श्री गौरी शंकर बिसेन एवं साथियों ने किया था। शांतिकुंज के श्री अरुण खण्डागले, श्री सूरज प्रसाद शुक्ला एवं युग गायकों की टोली पहुँची थी।
Last Update : 2010-09-06 08:20:11