शांतिकुंज सहर्ष मना ज्ञान और प्रेम का ...
युगसृजेता-शूरमाओं के अंतस् को छू गया ऋ...
पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों ने सीखा ...
विश्वम् पुष्टम् ग्रामे अस्मिन् अनात...
केशरिया उमंगों ने खिलाये तिरंगे के रं...
आदर्श टिहरी ग्राम को मिला शांतिकुंज क...
उपजोन खरगोन में निकलेंगी ...

1 sep 2010
खरगोन (मध्य प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ खरगोन में १८ जुलाई को उपजोन के वरिष्ठ कायर्कत्ताओं की गोष्ठी हुई । इसमें खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, आलीराजपुर, खण्डवा एवं बुरहानपुर के लगभग ३०० परिजनों ने भाग लिया । इसे संबोधित करते हुए डॉ. शंकरलाल पाटीदार ने भोपाल से आरंभ हो रही जन्म...

शांतिकुंज सहर्ष मना ज्ञान और प्रेम का पर्व श्रावणी-रक्षाबंधन
युगसृजेता-शूरमाओं के अंतस् को छू गया ऋषिचेतना का सूक्ष्म प्रवाह
पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों ने सीखा वैज्ञानिक अध्यात्मवाद
विश्वम् पुष्टम् ग्रामे अस्मिन् अनातुरम्
केशरिया उमंगों ने खिलाये तिरंगे के रंग
आदर्श टिहरी ग्राम को मिला शांतिकुंज की आदर्श ग्राम विकास योजना का लाभ शांति...
गुरुपूर्णिमा पर्व पर जन्म शताब्दी के देशव्यापी उल्लास की झाँकी
अमेरिकी विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित की गयी शांतिकुंज की बिटिया
जन्म शताब्दी की विशिष्ट स्फुरणा - चल पड़ा आत्म मंथन का क्रम
गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थियों को संगीत में मिला राष्ट्रीय सम्मान
अग्निकाण्ड से बेघर हुए साधुओं को राहत सामग्री
सेवा और सहयोग के लिए तत्पर है शांतिकुंज
शांतिकुंज में सौर ऊर्जा का विशाल स्तर पर प्रयोग
जीता राष्ट्रपति पुरस्कार
स्काउट-गाइड जाँच शिविर ने पढ़ाया अनुशासन का पाठ
आपदा प्रबंधन के राष्ट्रीय नेटवर्क की पहल
शांतिकुंज-देव संस्कृति विवि द्वारा गौरवशाली परम्पराओं को प्रोत्साहन
शिक्षक दिवस समारोह
जन्माष्टमी पर आत्मबोध की उल्लासयुक्त प्रेरणा
बंगला भाषी शिविर सम्पन्न
आपदा प्रबंधन के राष्ट्रीय नेटवर्क की पहल
31-10-2008

आपदा प्रबंधन एवं आदर्श ग्राम विकास की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला

राष्ट्र रूपी भवन की मरम्मत करनी है, तो सशक्त आधार बनाना पड़ेगा, समर्थ सुझाव देने पड़ेंगे और उन सबके लिए हम सब लोगों को मिलकर प्रयास करने पड़ेंगे । इन दिनों प्रकृति क्षुब्ध है । विभिन्न प्रकार की आपदाएँ हमारी कड़ी परीक्षा लेंगी । केवल गायत्री परिवार के पास ही समयदान की वह परिकल्पना है, जो इनको सफलता पूर्वक चुनौती दे सकती है ।


आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने यह विचार शांतिकुंज में १८ से २१ सितम्बर की तारीखों में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किये । इस अवसर पर उन्होंने केवल भूकम्प, बाढ़, सूखा, अग्निकाण्ड जैसी घटनाओं को ही आपदा न मानते हुए उसके व्यापक स्वरूप का वर्णन किया । उन्होंने कहा कि ब्रेन फीवर, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी महामारियाँ भी आपदाएँ हैं । वनों की कटाई से भूक्षरण और उनसे नदियों का उथला होता जाना, तालाबों का पटना और उन पर कस्बे और शहरों का निर्माण आपदा है । मिट्टी का अनुपजाऊ होता जाना आपदा है । भुखमरी और बेरोजगारी की समस्या आपदा है । पर्यावरण की समस्या आपदा है । ऊर्जा के साधनों का अभाव आपदा है । अधिकांश आपदाएँ प्राकृतिक नहीं, मानव निर्मित हैं, क्षणिक प्रयासों से इनका समाधान संभव नहीं । इसके लिए तो आपदा प्रबंधन की स्थाई इकाइयाँ ही कारगर सिद्ध हो सकती हैं ।


आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने कहा कि बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय बाहरी एजेंसियाँ उतनी कारगर सिद्ध नहीं होतीं, जितनी कि स्थानीय इकाइयाँ । आपदा का आँकलन और जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचा देने में बेहतर सफलता तभी मिलती है, जब स्थानीय आपदा प्रबंधन इकाइयों का जुड़ाव हो । अतः आगामी चुनौतियों के लिए गायत्री परिवार को देश के हर जिले-हर क्षेत्र में अपनी सुव्यवस्थित और निपुण आपदा प्रबंधन वाहिनियाँ गठित करने की आवश्यकता है ।
शांतिकुंज में आयोजित आपदा प्रबंधन एवं आदर्श ग्राम्य विकास की प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला में अधिकांश प्रांतों के ७५० से अधिक प्रमुख कार्यकर्त्ताओं ने भाग लेकर अपने क्षेत्रों में प्रशिक्षित आपदा प्रबंधन वाहिनियों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया । शांतिकुंज के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने उनकी योग्यता एवं क्षमताओं को पहचानने के लिए विदाई से पूर्व जानकारी एवं संकल्प पत्र भी भरवाये ।


चार दिवसीय शिविर के उद्घाटन सत्र में आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के साथ अंतर्राष्ट्रीय जल संरक्षण के लिए मेगसेसे पुरस्कार प्राप्त श्री राजेन्द्र सिंह, उत्तराखण्ड के आपदा न्यूनीकरण एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिशासी निदेशक डॉ. पियूष रौतेला, आपदा प्रबंधन विभाग-हरिद्वार के प्रभारी अधिकारी श्री विनोद गिरी गोस्वामी, शांतिकुंज प्रतिनिधि आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय एवं आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रभारी आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा मंचासीन थे । तीन दिनों में विचार अभिव्यक्ति एवं समूह चर्चाओं का क्रम रहा । तीसरे दिन सभी प्रतिभागी शांतिकुंज से २० किलो मीटर दूर ग्राम फतेहपुर टाँडा में ग्राम स्वच्छता एवं जनजागरण के प्रायोगिक कार्यों के लिए गये । शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं ने प्रतिदिन अलग-अलग सत्रों में अपने निर्धारित विषय पर विचार व्यक्त करते हुए शांतिकुंज द्वारा पिछले १५ से अधिक वार्षों से विभिन्न आपदाओं के समय किये जा रहे कार्यों के अनुभव बाँटे ।

२१ सितम्बर को आदर्श ग्राम्य विकास योजना के अंतर्गत गाँवों में स्वच्छता, चिकित्सा, जनजागरण, स्वावलम्बन प्रशिक्षण जैसे अभियान चलाने का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया । इसके लिए समस्त प्रतिभागी शांतिकुंज से २० कि.मी. दूर फतेहपुर टांडा, रेशम माजरा, माजरी गाँव एवं शेरगढ़ में गये । वहाँ गाँव वासियों के साथ सबकी भागीदारी से स्वच्छता, दीवार लेखन, चिकित्सा, जनसंपर्क, स्वास्थ्य शिविर, स्वावलम्बन प्रशिक्षण दीपयज्ञ जैसे कार्यक्रम सम्पन्न हुए ।


चार दिवसीय कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन पर उत्तराखण्ड शासन द्वारा निर्मित एक फिल्म दिखाई गयी । श्री रणविजय सिंह, श्री रोहिताश्व कसेर, श्री सालिग्राम अत्रि, श्री दिनेश जायसवाल एवं डॉ. अजय उपाध्याय ने सभा का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कीं । प्रतिभागियों ने जनसेवा के इस नेटवर्क से पूरे मनोयोग के साथ जुड़ने के संकल्प लिए । आदरणीय श्री गौरीशंकर शर्मा जी एवं आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने सभी को भावभरी विदाई दी । कार्यशाला का मंच संचालन श्री राकेश जायसवाल ने और संयोजन आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने किया ।
Last Update : 2010-09-06 08:20:11