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| उपजोन खरगोन में निकलेंगी ... |
1 sep 2010
खरगोन (मध्य प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ खरगोन में १८ जुलाई को उपजोन के वरिष्ठ कायर्कत्ताओं की गोष्ठी हुई । इसमें खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, आलीराजपुर, खण्डवा एवं बुरहानपुर के लगभग ३०० परिजनों ने भाग लिया । इसे संबोधित करते हुए डॉ. शंकरलाल पाटीदार ने भोपाल से आरंभ हो रही जन्म... |
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लगभग १२ वर्ष पहले शिकागो में हुए अश्वमेध महायज्ञ के बाद से शिकागा वासी डेस्प्लेन में एक छोटे-से कमरे में स्थापित गायत्री ज्ञान मंदिर से ही मिशन का भागीरथ कार्य कर रहे थे । दो वर्ष पहले उन्होंने इटास्का में १७ लाख डॉलर की कीमत का एक चर्च खरीद लिया । १०० लोगों की बैठक की क्षमता वाला यह चर्च अपनी आवश्यकताओं की दृष्टि से बहुत छोटा था । अतः परिजनों ने इसका विस्तार कर इसे १००० लोगों की बैठने की क्षमता वाला बनाने का कार्य आरंभ कर दिया है । इसके निमित्त निर्माण कार्य का भूमिपूजन ४ अगस्त को आदरणीय डॉ.साहब के कर कमलों से सम्पन्न हुआ ।
महाकाल की उपस्थिति
भूमिपूजन का यह कार्यक्रम सहज नहीं था । आँधी-तूफान के अत्यंत खराब मौसम का परिजनों को सामना करना बड़ा । जैसे ही जॉन एफ कैनेडी एअरपोर्ट न्यूयॉर्क से आदरणीय डॉ.साहब एवं श्री राजकुमार वैष्णव का हवाई जहाज उड़ान भरने वाला था, शिकागो में खराब मौसम की सूचना मिल गयी, तीन घण्टे जहाज में ही बिताने के बाद जहाज रवाना हुआ । शिकागो पहुँचने पर मिशिगन लेक पर घने काले बादल मँडरा रहे थे । वहाँ जहाज को मौसम की अनुकूलता के लिए आसमान में ही प्रतीक्षा करनी पड़ी ।
सायंकाल तेज तूफान की भविष्यवाणी थी । भूमिपूजन के समय तेज बिजली और मूसलाधार बारिश हो रही थी । वॉटर प्रूफ टैण्ट में ४ 3 ३ के गड्ढे में भूमिपूजन का कर्मकाण्ड चल रहा था । तभी इतनी तेज बिजली चमकी, जैसे लगा कि वह भूमिपूजन स्थल पर ही गिरी है । आदरणीय डॉ. साहब ने पूरे विश्वास के साथ उपस्थित लोगों से कहा, ''चिंता न करें, पूज्य गुरुदेव महाकाल हैं, वे अपनी उपस्थिति का आभास दे रहे हैं ।'' इस खराब मौसम में बिजली गायब होने की पूरी संभावना थी, लेकिन जब तक कार्यक्रम चला, तब तक कुछ नहीं हुआ । जैसे ही भोजनोपरांत कार्यक्रम समाप्त हुआ, रातभर के लिए बिजली गायब हो गयी ।
कार्यक्रम की रूपरेखा
भूमिपूजन का यह कार्यक्रम आदरणीय डॉ. प्रणव जी के अलावा प्रो.प्रमोद भटनागर, राजकुमार वैष्णव, पुष्कर राज, रमेश तिवारी, शांतिलाल पटेल एवं जमुना साहू की टोली ने पूरे साज-संगीत एवं भावभरे कर्मकाण्ड के साथ सम्पन्न कराया । खराब मौसम के बावजूद भारी जन उपस्थिति थी । २०० लोगों की बैठक क्षमता वाले स्थान पर ३०० लोग बैठे-खड़े नजर आये ।
शांतिकुंज का संदेश
इस समारोह में शांतिकुंज के प्रमुख प्रतिनिधि ने ईश्वर विश्वास-गुरु विश्वास को अपने संदेश का केन्द्र बिंदु बनाया । उन्होंने कहा कि यह श्रद्धा और विश्वास एक शिष्य की प्रमुख शक्ति है, जो बड़े से बड़े कार्य सम्पन्न करा लेती है । गायत्री चेतना केन्द्र, न्यूजर्सी और गायत्री ज्ञान मंदिर, शिकागो की सक्रियता से गोरे लोगों में वैज्ञानिक अध्यात्मवाद तथा गायत्री चेतना का तेजी से विकास होगा । इन केन्द्रों के माध्यम से विश्व की विभिन्न भाषाओं में मिशन के साहित्य का तेजी से अनुवाद होगा, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया ।
हर्षिल पटेल ने गायत्री चेतना केन्द्र के निर्माण की आवश्यकता बतायी, पार्थ मांगरोला ने सम्पन्नों से युग निर्माण आन्दोलन एवं गायत्री चेतना केन्द्र के निर्माण में सहयोग का आवाहन किया । नील एवं पूजन ने नॉर्थ कैरोलिना के यूथ कैम्प में भागीदारी के संस्मरण सुनाए । उन्होंने कहा, ''श्रद्धेय डॉ.साहब के साथ बिताये एक-एक क्षण हमारे लिए दुर्लभ हैं । मिशन को, भारतीय संस्कृति को बहुत करीब से जानने का मौका मिला । अमेरिकन के बीच इंडियन होने का मुझे गर्व है । मैं अब नियमित प्रज्ञायोग करने लगा हूँ ।''
युवा चेतना का उद्भव
गायत्री ज्ञान मंदिर, शिकागो के विस्तार हेतु भूमिपूजन समारोह की प्रत्येक गतिविधियों का संचालन युवकों ने ही किया । आदरणीय डॉ.साहब के एअरपोर्ट पर स्वागत से लेकर समग्र कार्यक्रम के संचालन का पूरा कार्य युवकों ने ही सँभाला । अमेरिका जैसे आधुनिक राष्ट्र में रहने वाले नवयुवकों यह आध्यात्मिक आस्था उज्ज्वल भविष्य का सुखद संकेत थी और आम समाज के लिए एक सुखद आश्चर्य भी ।
अमेरिकी उद्यमों में आयोजित हुईं सेमीनार
बैंक ऑफ अमेरिका में
बैंक ऑफ अमेरिका की सुषाण ई. ग्रीन-एक्ज़ीक्यूटिव ट्रेनिंग की प्रमुख, अन्ना डेल और हेमा पोपट ने बैंक के मुख्यालय मेनहटन में २९ एवं ३० जुलाई को स्पीरिचुअलिटी इन कॉर्पोरेट सेक्टर विषय पर एक सेमीनार आयोजित कीं, जिसके मुख्य वक्ता आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी थे । पहले दिन डायवर्सिटी एण्ड इंक्लूजन विषय पर उनका व्याख्यान हुआ, जिसे बैंक की ५३ राज्यों में स्थित शाखाओं के ३००० लोगों ने वीडियो कॉन्फरेंसिंग के माध्यम से सुना और प्रश्नोत्तरी काल में अपनी जिज्ञासाओं के समाधान पाये ।
आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने बताया कि आज पूरी दुनिया सिमटकर छोटी हो गयी है । एक ही प्रतिष्ठान में पूरी दुनिया से आये लोग काम कर रहे हैं । ऐसे में सभी की भावना और संस्कृति को समझकर उनसे श्रेष्ठतम कार्य करा लेना भी एक चुनौती है । सांस्कृतिक जागरूकता समय की एक बड़ी आवश्यकता बन गयी है । ऐसे में अध्यात्म के सूत्रों को समझकर उन्हें अपनाना किसी भी संस्था की सफलता के लिए बहुत जरूरी हो गया है ।
अध्यात्म जीवन जीने की वह कला है, जो पारिवारिक भावनाओं का पोषण करती है । वह केवल पत्नी-बच्चों से ही नहीं, बल्कि अपने आश्रितों और पालतू पशुओं से भी प्यार करना सिखाती है । यदि अधिकारी-कर्मचारियों के बीच यह पारिवारिक संबंध स्थापित हो जायें, तो सभी अपनी कम्पनी के लाभ-हानि में अपनापन अनुभव करने लगते हैं, जिसके बेहतर परिणाम आते हैं । उन्होंने श्रोताओं से कहा कि यदि नित्य १० मिनट ध्यान का अभ्यास कर लिया जाये, तो वह तनाव से मुक्ति के लिए चाय-कॉफी से कई गुना ज्यादा असरकारक सिद्ध हो सकता है ।
दूसरे दिन बैंक के एक्ज़ीक्यूटिव्स के बीच उनका उद्बोधन था, जिसमें सुषाण, अन्ना डेल, मैग्रा, शियांग चू, अल्बर्टा आदि १०० से अधिक प्रमुख अधिकारी शामिल थे । शांतिकुंज प्रतिनिधि ने धर्म-सम्प्रदाय से भिन्न अध्यात्म के सर्वोपयोगी सार्वभौम सूत्रों की मार्मिक व्याख्या की । उन्होंने कहा कि अध्यात्म का मूल ध्येय ही व्यक्ति की क्षमताओं का विकास करना और अनुशासित रहकर सर्वोत्तम मनोयोग से जटिल कामों को भी सरलता के साथ सम्पन्न करना है । अध्यात्म कर्मकाण्ड की सीमा में बँधा नहीं है, वह तो प्यार बढ़ता है, अपनापन सिखाता है, विरोधियों को भी अपना मित्र बनाता है । जो आध्यात्मिक जीवन जीता है, उसके जीवन में निरर्थक तनाव के लिए कोई स्थान ही नहीं है ।
शांतिकुंज के संदेश से सभी बहुत प्रभावित थे । सुश्री सुषाण ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ''औरों की तो मैं नहीं जानती, लेकिन मेरा तो तनाव समाप्त हो गया, मुझे जीवन की नयी राह मिली है ।'' प्रस्तुत कार्यक्रम की सफलता में श्रीमती शिखा सक्सेना का अविस्मरणीय योगदान रहा ।
डरहम में
डरहम के हार्डवेअर रिसर्च सेण्टर इमर्जीस ने २२ जुलाई की सायं अपने मैनेजमेण्ट एक्ज़ीक्यूटिव्स, बिजनेस मैन और आई.टी. प्रोफेशनल्स की एक सेमीनार आयोजित की । लगभग ५० एक्ज़ीक्यूटिव्स इस गोष्ठी में उपस्थित थे । उन्हें शांतिकुंज के प्रमुख प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने तनाव प्रबंधन विषय पर संबोधित किया । दैनिक जीवन को तनावमुक्त रखने के लिए आध्यात्मिक जीवन पर आधारित इतने व्यावहारिक उपाय उन्होंने पहली बार सुने थे । कम्पनी के सीईओ श्री जयशंकर जी एवं सीईओओ श्री महेश रामानुजम ने आदरणीय डॉ. साहब का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए माना कि पारिवारिक सूत्रों के समावेश से व्यवसाय में तनाव में संतुलन स्थापित करते हुए बेहतर सफलता पायी जा सकती है । अगले वर्ष उन्होंने अपने पूरे स्टाफ के लिए ऐसी कार्यशाला आयोजित करने का मानस व्यक्त किया ।
क्वीमोण्डा में
श्रीमती संगीता सिंह के मुख्य प्रयासों से कम्प्यूटर हार्डवेअर की उन्नत तकनीक के विकास पर कार्य कर रही अमेरिका की मल्टीनेशनल कम्पनी क्वीमोण्डा ने आदरणीय डॉ. साहब को आमंत्रित कर अपने मैनेजमेण्ट प्रमुखों के बीच एक्सेलेंस इन कॉर्पोरेट कल्चर विषय एक व्याख्यान रखा । इसमें मैनेजमेण्ट, फाइनांस, आई.टी., आर एण्ड डी. आदि के ८० पदाधिकारी उपस्थित थे । इनमें अमेरिकन, कोरियन, चाइनीज़ एवं यूरोपियन भी शामिल थे । आदरणीय डॉ. साहब ने उन्हें व्यापार और कार्यप्रबंधन की आध्यात्मिक तकनीकें बतायीं । उन्होंने कहा कि अध्यात्म का सही मर्म समझने वाला सद्गुण धारण करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है । वह विकार और तनाव से मुक्त होकर व्यक्तिगत विकास ही नहीं करता, बल्कि अपने व्यावसायिक क्षेत्र में उन्नति करता जाता है ।
उनके समक्ष दैनिक जीवन के लिए आवश्यक सरल आसन-प्राणायाम का प्रदर्शन किया गया और १० मिनट ध्यान का अभ्यास कराया गया । प्रतिभागियों का कामकाजी समय में काम के तनाव को भूलकर एक अलग ही दुनिया में खो जाना इस व्याख्यान की अद्भुत सफलता थी । आनंद और उल्लास में डूबे महानुभावों ने अपने मन खोले और निजी जिज्ञासाओं का समाधान पाया ।
आदरणीय डॉ. प्रणव जी के स्वर में
ऑडियो सीडी भक्ति सुधा
शिकागो में श्री नरेन्द्र देसाई, हरेन्द्र मांगरोला आदि परिजनों की विशेष प्रार्थना पर पहली बार आदरणीय डॉ.साहब ने ऑडियो सीडी के निर्माण के लिए अपने स्वर में १० गीत रिकॉर्ड कराये । परिजनों ने इसके लिए स्टूडियो बुक किया । बिना किसी पूर्वाभ्यास के उन्होंने ये गीत रिकॉर्ड कराये, जिनमें एक तुम्हीं आधार ...., ज्योति से ज्योति जगाओ सद्गुरु..... जैसी सरल धुनों वाले गीत थे, तो जटिल राग वाली गुरुवंदनाएँ भी । श्री राजकुमार वैष्णव, श्री पुष्कर राज, श्री रमेश तिवारी, श्री जमुना साहू एवं श्री शांतिलाल पटेल के ताल-संगीत से सुसज्ज़ित ये गीत आदरणीय डॉ.साहब के समर्पण भाव के संयोग से बहुत ही मार्मिक हो गये हैं । उन्होंने ही इस सीडी को भक्ति सुधा शीर्षक दिया ।
वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के विस्तार के लिए
एकजुट हुए १६ संगठन
नॉर्थ कैरोलिना में एकजुट हुए १६ संगठन
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के नॉर्थ कैरोलिना पहुँचने से वहाँ सक्रिय विभिन्न संगठनों में भारतीय संस्कृति के उन्नयन और मानवता के उत्थान के लिए परस्पर एकजुट होकर वैज्ञानिक अध्यात्मवाद को अपनाने का उत्साह बढ़ा । १६ संगठनों ने मिलकर हिंदू सोसाइटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के विशाल हिंदू भवन में एक गोष्ठी का आयोजन किया, जिसकी अध्यक्षता के लिए आदरणीय डॉ. प्रणव जी आमंत्रित थे ।
इस गोष्ठी में आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने एन्हांसिंग द क्वालिटी ऑफ लाइफ स्पिरिचुअलिटी विषय पर अपने विचार व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के सच्चे अनुयायी निजी स्वार्थ की अपेक्षा लोकमंगल को ही अपना लक्ष्य बनाते रहे हैं । स्वामी विवेकानंद, जगद्गुरु शंकराचार्य जैसे धर्म प्रचारक अपने इन्हीं मनोभावों के कारण विश्व पटल पर गहरी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं । आज भी जो लोग मानवता का कल्याण चाहते हुए हैं, उन्हें युगऋषि परम पूज्य पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी के बताये वैज्ञानिक अध्यात्मवाद को जन मानस में स्थापित करना होगा, निराधार प्रतिपादनों को आज का प्रगतिशील समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा । उन्होंने सभी उपस्थित संगठन-प्रतिनिधियों से रूढ़ियाँ छोड़ने का आवाहन किया ।
इस गोष्ठी में शिरीष आमीन, चिन्मय बाल विहार, रश्मि पटेल-अध्यक्ष हिंदू सोसाइटी नॉर्थ कैरोलिना, अमन गुप्ता-प्रमुख बोर्ड, हिंदू स्वयं सेवक संघ के श्री वेणुगोपाल एवं श्री शेलचर जोशी, बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ीं अदिति घोष एवं इशिता घोष, चिकित्सक डॉ. अनंत सोनी, आर्ट ऑफ लिविंग के सिद्धार्थ झा, पवन, हिंदू सोसाइटी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर धनंजय पटेल, डॉ. ध्रुव कुमार, हर्षद गाँधी, गायत्री परिवार के जयंती पटेल, संजय शर्मा, जे.पी. सिंह, विपुल पटेल, संगीता सिंह आदि उपस्थित थे ।
संगोष्ठी बहुत उपयोगी रही । सभी ने अपनी प्रगतिशील जिज्ञासाओं के संदर्भ में आदरणीय डॉ. प्रणव जी से मार्गदर्शन पाया । उल्लेखनीय है कि इस गोष्ठी में भाग लेने वाले सदस्यों ने युवा पीढ़ी के अध्यात्म से दूर होने, उनमें मंदिर तथा अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेने की बजाय रास-गरबा जैसे मनोरंजक कार्यक्रमों की ओर झुकाव बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी । उन्हें देव संस्कृति विश्वविद्यालय के धर्म विज्ञान पाठ्यक्रम से प्रगतिशील विचारधारा वाले युवा पुरोहितों के निर्माण की जानकारी दी गयी, जो आडंबर और अंधविश्वास विहीन धर्मतंत्र की बागडोर संभाल सकेंगे । यूनिटी फोरम के बॉक्स में प्रकाशित हैं । |
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