शांतिकुंज सहर्ष मना ज्ञान और प्रेम का ...
युगसृजेता-शूरमाओं के अंतस् को छू गया ऋ...
पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों ने सीखा ...
विश्वम् पुष्टम् ग्रामे अस्मिन् अनात...
केशरिया उमंगों ने खिलाये तिरंगे के रं...
आदर्श टिहरी ग्राम को मिला शांतिकुंज क...
उपजोन खरगोन में निकलेंगी ...

1 sep 2010
खरगोन (मध्य प्रदेश)
गायत्री शक्तिपीठ खरगोन में १८ जुलाई को उपजोन के वरिष्ठ कायर्कत्ताओं की गोष्ठी हुई । इसमें खरगोन, बड़वानी, झाबुआ, आलीराजपुर, खण्डवा एवं बुरहानपुर के लगभग ३०० परिजनों ने भाग लिया । इसे संबोधित करते हुए डॉ. शंकरलाल पाटीदार ने भोपाल से आरंभ हो रही जन्म...

देश-विदेश की विभूतियों में हुआ युग चेतना का संचार
मॉस्को वासियों ने किया सद्गुरु को नमन
न्यूजर्सी में गुरुपूर्णिमा पर १०८ कुण्डीय यज्ञ
अमेरिका के नेशनल यूथ कैम्प में बही सेवा, सहयोग और सद्ज्ञान की गंगा
वॉशिंगटन (अमेरिका) में लगा पुस्तक मेला
रूस के मास्को शहर में आयोजित हुई अद्वैत वेद काँग्रेस
लॉस एंजिल्स में गायत्री की प्राण प्रतिष्ठा
गायत्री चेतना केन्द्र, पिस्काट वे
स्टोनी क्रीक में ५१ कुण्डीय महायज्ञ सम्पन्न
ह्यूस्टन में स्थापित हुआ गायत्री चेतना केन्द्र
अमेरिका में जन्म शताब्दी की हलचल
कनाडा का यूथ कैम्प
गायत्री ज्ञान मंदिर, शिकागो का विस्तार और महाकाल की उपस्थिति का आभास
राष्ट्रीय युवा चेतना शिविर और कार्यकर्त्ताओं की कार्यशालाएँ
न्यूजर्सी का यूथ कैम्प-बाल निर्माण अभियान की शानदार सफलता
युवाओं एवं कई विश्वविद्यालय में देव संस्कृति को अपनाने का आकर्षण बढ़ा
मॉरिशस में यूथ कैम्प की तैयारियाँ
डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के न्यूजीलैण्ड प्रवास से तीव्र हुई आश्वमेधिक हलचल
गणतंत्र दिवस एवं वसंत पर्व की आकर्षक प्रस्तुतियाँ
राधाकृष्ण मंदिर में गायत्री माता की प्राण प्रतिष्ठा
न्यूजर्सी का यूथ कैम्प-बाल निर्माण अभियान की शानदार सफलता
29-8-2008
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी की टोली के अमेरिका प्रवास का दूसरा यूथ कैम्प रामोपा कॉलेज ऑफ न्यूजर्सी, महवा में आयोजित हुआ । इसमें न्यूजर्सी, न्यूयॉर्क, कनेक्टिकट, मैसाचुसेट्स, नॉर्थ हैम्पशायर, पेंसिलवेनिया एवं मेरीलैण्ड के ३०० बच्चे और उनके ८० अभिभावकों की भागीदारी रही । शिविर में ७ से ३० वर्ष तक के बच्चे शामिल थे, लेकिन किशोरावस्था के बच्चों को जीवन के नाजुक मोड़ पर सही दिशा देने का प्रयास शांतिकुंज प्रतिनिधियों द्वारा मुख्य रूप से किया गया ।

कार्यक्रम के संचालन के लिए नॉर्थ कैरोलिना के यूथ कैम्प की ही भाँति शांतिकुंज का नौ सदस्यीय दल पहुँचा । दक्षिण भारत में मिशन के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता डॉ. रामकृष्ण जी भी एक शिक्षक के रूप में इस कैम्प में तीनों दिन उपस्थित रहे । उनके कारण दक्षिण भारतीयों का एक बड़ा वर्ग भी शिविर में शामिल हुआ ।

बाल संस्कार शाला से उभरा आन्दोलन-न्यूजर्सी का यह यूथ कैम्प फिलाडेल्फिया राज्य के बेन्सलम शहर, जो अमेरिका में गुजरात के एक गाँव की तरह माना जाता है, में पिछले छः वषों से संचालित बाल संस्कार शाला के प्रयासों से आयोजित हुआ । सर्वश्री प्रदीप शाह, श्रीमती अरुणा, एकता, जयदीप, प्रवीण कापड़िया, जयश्री, वर्षा आदि यह बाल संस्कार शाला चलाते हैं । वस्तुतः वे अमेरिका में बाल निर्माण आन्दोलन के ही नहीं, यूथ कैम्पों के प्रणेता भी माने जाते हैं, जिन्होंने आदरणीय डॉ. प्रणव जी से सतत मार्गदर्शन पाते हुए बाल निर्माण को ही अपना जीवन लक्ष्य बना लिया और शानदार उपलब्धियाँ अर्जित कीं ।


अत्याधुनिक सुविधाएँ-रामोपा कॉलेज बच्चों की हर प्रकार की सुविधा की दृष्टि से बड़ा अनुकूल था । आवास, भोजन, खेल के मैदान के अलावा कम्यूटर एक्सेस, मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन, इण्टरनेट, वाई-फाई साउण्ड सिस्टम जैसी अति आधुनिक सुविधाओं का लाभ बच्चों को मिला ।

अलग वय-अलग वर्ग-परंपरा के अनुरूप शिविरार्थी बच्चों को तीन वर्गों में बाँटा गया । ७ से ९ वर्ष तक के बच्चों में संकल्प, सृजनशीलता एवं आत्मबल बढ़ाने के प्रयास किए गये । पेण्टिंग, बाल निर्माण की कहानियाँ, रामायण आदि के कथानक, समूह चर्चा, खेलकूद आदि के माध्यम से बाल मन में अच्छी आदतों को अपनाने की और महापुरुषों का अनुकरण करने की प्रेरणा दी गयी । मानव डॉ. रचना जिरथ, गुलाटी, अर्जुन गुप्ता, निर्मल गुप्ता, मयंक, जय पटेल, कुश चंद्र, प्रियंका, मितेश कापड़िया, रश्मि, रचना पटेल आदि ने उनकी विविध गतिविधियों का संचालन किया ।

दूसरा वर्ग १० से १३ वर्ष वय के बच्चों का था । स्वयं आद. डॉ. प्रणव जी ने उन्हें योग और ध्यान का अभ्यास कराया । देवत्व-असुरत्व, आत्मा-परमात्मा जैसे विषयों पर इन बच्चों की समूह चर्चा करायी गयी । आद. डॉ. साहब का इन बच्चों के नवनिर्माण पर विशेष ध्यान रहा । मितेश कापड़िया, शिवि चंद्र, नेहा गुप्ता, प्रियंका मेहरोत्रा, नृपाली पटेल, डॉ. रचना जिरथ, तेजश्री कस्तूरी ने उनकी कक्षाएँ लीं ।
१४ से अधिक वर्ष के ७० बच्चे शिविर में शामिल थे । शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने उनका मागदशर्न किया । आदरणीय डॉ. साहब ने पहले दिन अहंकार एवं आत्मविश्वास का अंतर समझाते हुए मन को छू लेने वाला उद्बोधन दिया ।

अगले दिन का उद्बोधन लीडिंग पॉजिटिव लाइफ एण्ड टैकलिंग हर्डल्स वैदिक ऋचाओं पर आधारित था । अंतिम दिन लिविंग इन हामोर्नी विथ फैमिली एण्ड सोसाइटी विषय पर समूह चर्चा हुई । सप्त आन्दोलनों पर चर्चा करते हुए अधिकांश लोगों ने माना कि सृजनात्मक आन्दोलनों की सफलता साधना पर ही आधारित है । श्री कालीचरण शर्मा, प्रो. प्रमोद भटनागर एवं श्री संजय सक्सेना ने गायत्री एवं यज्ञ की वैज्ञानिकता से बच्चों को अवगत कराया ।


वाद-विवाद प्रतियोगिता यूथ कैम्प का बड़ा रोचक विषय था । १० से २० वषर् के बच्चों के बीच प्रतियोगिता हुई । चर्चा के विषय थे-योग वसेर्स जिम, ऑर्गनाइज़्ड रिलीजन वर्सेस पर्सनल स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेस । नियमित जिम जाने वाले चि.जयदीप ने मितेश कापड़िया को अपने दोनों हाथों से उठाकर जिम की श्रेष्ठता सिद्ध करने का प्रयास किया, लेकिन मितेश ने अपने योगाभ्यास से जो करतब कर दिखाये, वह सबके लिए आश्चयर्जनक थे । अंततः योग को ही श्रेष्ठ माना गया ।

चार घण्टे तक चले इस सत्र ने सभी को आत्मीयता के रंग में रंग दिया । आदरणीय डॉ. साहब प्रत्येक ग्रुप की चर्चा का विधेयात्मक पक्ष प्रस्तुत करते थे । बच्चे उनसे खूब घुले-मिले । स्वामी, विकास, कृपा, बरखा, शिवि, मितेश ने सभी को मिशन के विचारों में रंग दिया ।

ध्यान-प्रार्थना-प्रतिदिन प्रातः आदरणीय डॉ. साहब द्वारा ध्यान कराया गया । प्रो. प्रमोद भटनागर ने योग एवं पवन मुक्तासन की कक्षा ली । प्रतिदिन समूह प्रार्थना होती थी, जिसका संचालन स्वयं आदरणीय डॉ. साहब ने किया । श्री शिवनारायण जी, श्री रमेश तिवारी, श्री छविलाल जी, श्री शांतिभाई पटेल एवं श्री राजकुमार जी की टोली के भावभरे गीतों ने उन्हें सरस बनाया । जय महाकाल की धुन पर बच्चे आह्लादित होकर थिरकते रहे । श्री कालीचरण शर्मा जी ने वैदिक ऋचाओं का भाव एवं अर्थ बच्चों को समझाया ।

अनुभवों ने जगाई आस्था-प्रार्थना के बाद बड़े पर्दे पर मल्टीमीडिया प्रस्तुत होती, जिसमें शांतिकुंज, देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं उनकी गतिविधियों का दिग्दर्शन कराया गया । शिवि चंद्रा एवं मितेश कापड़िया ने पावर पॉइण्ट प्रस्तुतिकरण के साथ अपने शांतिकुंज के अनुभवों को गूँथते हुए शिविरार्थी बच्चों में युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव-परम वंदनीया माताजी की ऐसी दिव्य तपःस्थली के दर्शन करने की हूक जगाई ।


सांस्कृतिक कार्यक्रम-नॉर्थ कैरोलिना के शिविर की भाँति ही प्रतिदिन सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए । बरखा पटेल का शिव तांडव, स्वामी का तबला वादन, दत्ता पण्ड्या द्वारा पू. गुरुदेव-प.वं. माताजी के जीवन की झाँकियों की प्रस्तुत अत्यंत रोचक थी । डिफरैण्ट लैंग्वेज प्रोग्राम के रूप में विचार क्रांति का विशेष प्रयोग हुआ । बच्चों ने कंधे पर पुस्तक प्रदर्शनी लेकर फेंच, स्पेनिश, इटालियन, जर्मन, अंग्रेजी, पंजाबी, गुजराती एवं हिंदी में गुरुवर के साहित्य एवं मिशन का परिचय बड़े जोश-खरोश के साथ दिया ।

खेलकूद-१ अगस्त को खेलकूद प्रतियोगिताएँ हुईं । बच्चे और बड़े सभी खेलों में शामिल हुए । क्रिकेट खेलते समय सभी ने छक्के-चौकों का खूब आनंद लिया । प्रज्ञागीतों पर आधारति अंत्याक्षरी हुई ।

अभिभावकों का शिविर

इस शिविर में ३०० बच्चों के साथ उनके ८० अभिभावक भी शामिल हुए । उनका अलग से एडल्ट कैम्प चला, जिसका संचालन श्री कालीचरण शर्मा एवं प्रो. प्रमोद भटनागर ने किया । डॉ. रामकृष्ण जी ने व्हॉट इस इन वेदाज़, स्पिरिचुआलिटी इन डेली लाइफ, साइंस ऑफ गायत्री विषयों पर उनकी कक्षा ली । श्री कालीचरण शर्मा ने प्रज्ञापुराण कथा पर भी प्रकाश डाला ।

आदरणीय डॉ. साहब ने जन्म शताब्दी वर्ष की तैयारियाँ एवं हमारे गुरुदेव तथा कायर्कत्तार् पाथेय विषय से अपना संदेश दिया । उन्होंने कहा-अमेरिका के कार्यकर्त्ता पूज्यवर के बड़े बेटे हैं, उनकी विशेष जिम्मेदारियाँ हैं । उन्हें साधना के बल पर स्वयं अपनी क्षमताओं का विकास करते हुए जन्म शताब्दी वर्ष एवं अमेरिका में मिशन के विस्तार के संदर्भ में अपनी जिम्मेदारियाँ निर्धारित करनी होंगी । दत्ता पण्ड्या, प्रवीण कापड़िया, विपुल पटेल इस एडल्ट शिविर के समन्वयक थे ।

शांतिकुंज परिवार की सक्रियता

विदेशों में बसे हजारों कर्मठ युग सेनानियों की तरह ही अमेरिका-इगलैण्ड में बसे शांतिकुंज के जीवनदानी कार्यकर्त्ताओं के बच्चे एवं स्वजन भी गुरुसत्ता की चेतना को व्यापक बनाने के लिए पूरे मनोयोग से सक्रिय हैं । आदरणीय डॉ. प्रणव जी के प्रस्तुत प्रवास में रिचमण्ड वर्जीनिया में बसी श्रीमती उर्वशी बेन मिस्त्री, जो गायत्री तपोभूमि के समर्पित कार्यकर्त्ता श्री घनश्यामभाई की बहिन हैं, और स्वाती सोनी, पूजा मोटवानी ने मिलकर स्थानीय हिंदू मंदिर में सावर्जनिक दीपयज्ञ का आयोजन किया था । इसी के साथ गायत्री परिवार रिचमण्ड वर्जीनिया का शुभारंभ हुआ ।

आदरणीय डॉ. साहब ने इस दीपयज्ञ में उपस्थित भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी धर्म-संस्कृति को भूलें नहीं, अपितु गायत्री और यज्ञ की वैज्ञानिकता का संदेश इष्टमित्रों, स्नेही स्वजनों और सभी परिचितों तक पहुँचाते हुए अपने सनातन धर्म के प्रति श्रद्धा और विश्वास बढ़ायें ।

गायत्री चेतना केन्द्र, न्यूजर्सी का भूमिपूजन एवं १५१ कुण्डीय यज्ञ

३ अगस्त को २४० सेण्टिनेण्टल एवेन्यू, पिस्काटवे, न्यूजर्सी में गायत्री चेतना केन्द्र निर्माण के लिए भूमिपूजन समारोह सम्पन्न हुआ । देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने इसका भूमिपूजन करते हुए गायत्री चेतना केन्द्र को प्रवासी भारतीयों की यज्ञीय भावना की साकार होती सुकृति बताया । आगामी एक वर्ष में ही इसकी प्राण प्रतिष्ठा हो जाने का विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह केन्द्र लोकसेवी कार्यकर्त्ताओं के प्रशिक्षण का केन्द्र बनेगा । उन्होंने देसंविवि के न्यूनतम पाँच प्रोफेसर-शिक्षक वहाँ नियुक्त कर शिक्षण प्रक्रिया को अनवरत चलाते रहने का आश्वासन व्यक्त किया । भूमिपूजन समारोह में न्यूयॉर्क-न्यूजर्सी के प्रसिद्ध उद्योगपति श्री केनी देसाई, श्री नरेन्द्र लखानी, श्री चेतन जी, श्री संदीप जी, श्रीमती अनीता सिंह एवं गायत्री परिवार के सैकड़ों कार्यकर्त्ता-विशेष अंशदानी उपस्थित थे ।

उसी दिन दोपहर लेक पार्क एडिसन, न्यूजर्सी में १५१ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ आयोजित था, १२००० से अधिक लोगों ने इसमें भाग लिया । नॉर्थ-ईस्ट अमेरिका के सर्वश्री नटुभाई, रावजी भाई, अल्पेश भाई, बाबूभाई कापड़िया, प्रवीणभाई कापड़िया, श्रीमती जयश्री बेन पटेल, कल्पेश पटेल, सुभाष पटेल आदि के नैष्ठिक प्रयास से यह कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें हजारों लोगों को युगधर्म निभाते हुए इस युग की महाशक्ति गायत्री से जुड़ने की प्रेरणा मिली, उन्होंने गायत्री की दीक्षा ली ।
Last Update : 2010-09-06 08:20:11